इतिहास :
इतिहास अतीत एवं वर्तमान के बीच निरंतर संवाद का नाम है ।
इतिहास का अध्ययन कैसे करें ?
इतिहास के अध्ययन का अर्थ तथ्यों का संकलन नहीं है ।
बल्कि इतिहास के अध्ययन का अर्थ है राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में परिवर्तन के तत्वों को रेखांकित करना।
जहां तक तथ्य का सवाल है, तो यह महज उन परिवर्तनों के उदाहरण है।
भारतीय इतिहास के विभाजन का क्या आधार रहा है ?
भारत का पहला इतिहास एक ब्रिटिश लेखक जेम्स मिल ने लिखा ओर इसने भारत के इतिहास को तीन कालों में बांटा-हिन्दू काल, मुस्लिम काल, एवं ब्रिटिश काल। किन्तु इसके विभाजन का आधार व काल दोनों गलत था।
आगे भारत के राष्ट्रवादी इतिहासकारों ने जेम्स मील के दिए गए हिन्दू काल, मुस्लिम काल और ब्रिटिश काल जैसे नामों को बदलकर प्राचीन काल, मध्य काल और आधुनिक काल रख दिया। परंतु विभाजन का पुराना आधार ही बना रहा और वह था – मोहम्मद गौरी के आक्रमण के साथ मध्य युग का आरंभ।
मार्क्सवादी इतिहास लेखन ने जेम्स मील के काल विभाजन को चुनौती देते हुए पूर्व मध्यकाल की अवधारणा लायी।
इन विद्वानों के अनुसार मध्य युग के आगमन के लिए हमें मोहम्मद गौरी के आक्रमण की प्रतीक्षा करने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसका आरंभ भारत में सामंतवाद के उद्भव के साथ लिया जाना चाहिए।
इनके विचार में सामंतवाद के उद्भव के बाद ही मोहम्मद गौरी का आक्रमण सफल हुआ था, इसलिए सामंतवाद के उद्भव को ही परिवर्तन का मुख्य कारण माना जाना चाहिए।
फिर इसे आधार बनाते हुए R. S. शर्मा ने 750 ईस्वी से 1200 ईस्वी के बीच के काल को पूर्व मध्य काल का नाम दिया है और 1200 ईस्वी के बाद वे इसे उत्तर मध्य काल का नाम देते है।
उसी प्रकार आधुनिक काल के संदर्भ में भी प्रचलित अवधारणा बदल गई। पहले पलासी के युद्ध के साथ आधुनिक काल की शुरुआत मानी जाती थी परंतु इस संदर्भ में एक दृष्टिकोण उभरकर आया कि पलासी के युद्ध के साथ ऐसा कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं हुआ था।
बल्कि इससे पूर्व यूरोपीय कंपनियों के आगमन के पश्चात भारत में बड़ी मात्रा में कीमती धातु आ रही थी।
अतः इस काल को पूर्व आधुनिक काल मान लिया गया जबकि ब्रिटिश शासन की स्थापना के बाद के काल को आधुनिक काल की संज्ञा दी गई। इसलिए हम भारतीय इतिहास को निम्नलिखित कालखंडों में बांटकर देख सकते हैं –
- प्राचीन काल – आरंभिक मानव के काल से लेकर 750 ईस्वी
- पूर्व मध्य काल – 750 – 1200 ईस्वी
- उत्तर मध्य काल (सल्तनत काल)
- पूर्व – आधुनिक काल (मुग़ल काल)
- आधुनिक काल (1757 के बाद)

परिवर्तन को रेखांकित करने के लिए निम्नलिखित खंडों में विभाजन आवश्यक है –
- प्रथम खंड – पूर्व – ऐतिहासिक काल एवं आध्य ऐतिहासिक काल (Pre-history to Proto-history)
- पुरापाषाण काल (paleolithic period) – लाखों वर्ष पूर्व से लगभग 10000 ईशा पूर्व
- मध्य पाषाण काल (Mesolithic Period) – 10000 – 6000 ईशा पूर्व तक
- नवपाषाण काल (Neolithic Period) – 6000 ईशा पूर्व से
- ताम्र पाषाण काल (Chalcolithic period) – 3500 ईशा पूर्व
- हड़प्पा सभ्यता (Harappan civilization) – 2600 BCE से 1900 BCE
- द्वितीय खंड –
- वैदिक काल (1500- 600 ईसा पूर्व)
- बुद्ध काल (600-400 ईसा पूर्व)
- मौर्य काल (400-200 ईसा पूर्व)
- मौर्योत्तर काल (200 ईसा पूर्व – 300 ईस्वी)
- गुप्त काल (300 -600 ईस्वी)
- गुप्तोत्तर काल (600 – 750 ईस्वी)
- पूर्व मध्य काल (750 – 1200 ईस्वी)
- तृतीय खंड –
- सल्तनत काल (1200- 1526 ईस्वी )
- मुगल काल (1526 ईस्वी से अब तक )
- आधुनिक काल
क्षैतिज परिवर्तन (Horizontal change):
1. राजनीतिक –
- राजनितिक विस्तार
- प्रशासन
2. आर्थिक –
- कृषि
- शिल्प एवं उद्योग
- व्यापार
- मुद्रा तथा नगरीकरण
3. सामाजिक –
- वर्ण एवं जाति
- महिलाओं
- शूद्रों एवं अछूतों की दशा
4. सांस्कृतिक –
- धर्म एवं दर्शन
- भाषा एवं साहित्य
- कला
- विज्ञान एवं प्रौध्योगिकी









