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पशुपालन का अर्थशास्त्र (Economy Notes) – Most Important for UPSC & SSC

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पशुपालन भारतीय अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि मानी जाती है यह अर्थव्यवस्था मे प्राथमिक क्षेत्र मे कृषि और संबंधित क्रियाओं मे शामिल होते है। वर्तमान मे भारत मे सबसे अधिक पशुधन पाये जाते है।

भारत वर्तमान मे भेंसों की संख्या मे प्रथम , बकरी की संख्या मे तृतीय और भेड़ो की संख्या मे चौथा स्थान रखता है।

मत्स्य उत्पादन मे भारत का दूसरा स्थान है।

भारत मे सबसे अधिक पशु वाले राज्य → UP, राजस्थान , MP है।

भारत के GVA मे पशुधन का योगदान लगभग 25% है यह क्षेत्र औसतन प्रति वर्ष 4.5% वृद्धि दर से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2014 से 2021 तक यहाँ संवृद्धि दर औसत 8% रही है भारत का दुग्ध उत्पादन मे विश्व मे पहला , मत्स्य उत्पादन मे दूसरा, अंडे के उत्पादन मे तीसरा और मांस के उत्पादन मे चौथा स्थान है।

पशुपालन के लाभ –

भारत मे पशुपालन कृषि , ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार तथा महिला आर्थिक सशक्तिकरण मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जो निम्न से स्पष्ट है –

  1. कृषि और पशुपालन का आपस मे गहरा संबंध होता है कृषि के खाद की आवश्यकता को पशुओं द्वारा पूर्ति किया जाता है और पशुओं के लिए चारा कृषि उपलब्ध करता है
  2. कृषि मे प्रच्छन्न बेरोजगारी को दूर करने के लिए पशुपालन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  3. भारत मे लगभग 45% सीमांत किसान है जिनके पास केवल 24% कृषि भूमि ही उपलब्ध है जबकि लगभग 55% पशुओं का संकेन्द्रण सीमांत किसान के पास है इस प्रकार ये पशुधन सीमांत किसानों के लिए वैकल्पिक आय का स्त्रोत माने जाते है।
  4. यह ग्रामीण क्षेत्र मे प्रोटीन, वसा का सबसे बेहतर स्त्रोत माना जाता है।
  5. पशुधन छोटे सीमांत किसानों के लिए बीमा के रूप मे काम करते है जिनहे आवश्यकता के समय बेचने पर आसानी से नकद धन प्राप्त हो जाता है
  6. ग्रामीण क्षेत्र मे अधिकांशत: महिलाओं द्वारा ही पशुओं का देख-रेख और उनके उत्पाद का विक्रय किया जाता है यह ग्रामीण क्षेत्र मे महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण करता है।

 

चुनौती –

  1. भारत मे पशुओं को सबसे अधिक होने वाला रोग खुर और मुख की बीमारी है जो पशुओं की उत्पादकता को खराब कर देता है।
  2. भारत दुग्ध उत्पादन मे विश्व मे प्रथम स्थान रखता है किन्तु दुग्ध उत्पादकता मे भारत काफी पीछे है।
  3. भारत मे चरागाह भूमि अत्यंत कम है यह कुल कृषि भूमि का मात्र 4.7% ही है। जबकि पूर्व योजना आयोग ने इसे बढ़ाकर 10% करने का सुझाव दिया था।

 

पशुपालन के विकास हेतु सरकारी प्रयास –

  1. राष्ट्रीय गोकुल मिशन
  2. राष्ट्रीय पशुधन मिशन
  3. ब्लू और पिंक क्रांति को बढ़ावा देना
  4. राष्ट्रीय पशुधन गर्भाधान मिशन
  5. राष्ट्रीय पशुधन अवसंरचना मिशन


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