कुछ महत्वपूर्ण टोपिक :
- आर्थिक संवृद्धि
- आर्थिक विकास
- समावेशी विकास
- सतत विकास
- हरित GDP
- आर्थिक संवृद्धि – आर्थिक संवृद्धि भौतिक अवधारणा है यह मात्रात्मक है क्योंकि इसकी गणना करना आसान है आर्थिक संवृद्धि के सूचक है –
- GDP वृद्धि दर
- प्रति व्यक्ति आय , इत्यादि
- आर्थिक विकास – यह गुणात्मक होता है जो शिक्षा , स्वास्थ्य जीवनस्तर इत्यादि को निर्दिष्ट करता है। इसके सूचक है –
- मानव विकास सूचकांक
- खुशहाली सूचकांक
- वैश्विक भुखमरी सूचकांक , इत्यादि
- बिना आर्थिक संवृद्धि के आर्थिक विकास संभव नहीं है अर्थात संवृद्धि विकास के लिए अनिवार्य शर्त मानी जाती है।
- समावेशी विकास : समावेशी विकास की अवधारणा 11 वीं पंचवर्षीय योजना से शुरू हुई । यह सबका साथ , सबका विकास की अवधारणा पर आधारित है। समावेशी विकास वह विकास होता है जहाँ सभी लोग (गरीब और अमीर) तथा सभी भौगोलिक क्षेत्र (शहरी और ग्रामीण) तथा सभी आर्थिक क्षेत्र (कृषि, उद्योग और सेवा) देश के आर्थिक विकास मे भागीदारी करते है तथा उसके लाभ को प्राप्त करते है यह गरीबी को कम करता है तथा रोजगार मे वृद्धि करता है।
- सतत विकास : पर्यावरणीय अनुकूल विकास तथा संपोषणीय विकास कहा जाता है तथा 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य करना जैसे 2025-26 तक पेट्रोल-डीजल मे इथेनोल मिश्रण को बढ़ाकर 20% (E-20) करना , 2030 तक सौर ऊर्जा से 500GW विद्युत उत्पन्न करना जिससे कोयले पर निर्भरता कम हो सके।
- हरित GDP : वर्तमान मे भारत मे हरित GDP की गणना नहीं की जाती । हरित GDP की अवधारणा सतत विकास से संबन्धित है वर्तमान मे विश्व की GDP लगभग 100 ट्रिलियन डॉलर का है। IMF की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2050 तक विश्व का GDP लगभग 180 ट्रिलियन डॉलर का होगा।






