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कृषि विपणन ( Economy ) – Important For SSC, UPSC & Other Exams

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प्रारूप —
  1. क्या ?
  2. विशेषता ?
  3. भारत मे कृषि विपणन दोषपूर्ण है कैसे?
  4. APMC- कृषि उत्पाद विपणन समिति
    1. क्या होता है ?
    2. क्या विशेषता ?
    3. कैसे दोषपूर्ण ?
  5. सुधार के उपार
  6. E-NAM
  7. APLM act, 2017
  8. संविदा कृषि
  9. सहकारी विपणन

कृषि विपणन : कृषि विपणन का अर्थ है किसान द्वारा अपने कृषि उत्पाद को बाजार मे विक्रय के योग्य बनाना (भंडारण, परिवहन , प्रसंस्करण , पैकेजिंग इत्यादि) तथा बाजार मे विक्रय कर लाभ अर्जित करना

भारत मे कृषि विपणन प्रणाली दोषपूर्ण है जो एक ओर देश मे खाद्य संकट को बढ़ा सकता है तो वहीं दूसरी ओर खाद्य मुद्रास्फीति मे वृद्धि कर सकता है। इसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि भारतीय कृषि विपणन प्रणाली मे मध्यस्थों या बिचोलियों कि भूमिका अत्यधिक है इस कारण एक ओर किसान अत्यंत कम कीमत पर अपने उत्पाद को विक्रय के लिए बाध्य होता है तो वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता बाजार से अधिक कीमत देकर क्रय करने के लिए विवश होता है। उपभोक्ता द्वारा चुकाए गए अधिक कीमत का लाभ कृषकों को प्राप्त नहीं होता इससे हतोत्साहित होकर वे उत्पादन कम कर देते है जो देश मे खाद्य संकट कि स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

इस प्रकार कृषि विपणन प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए निम्न 3 महत्वपूर्ण बातों का होना आवश्यक है –

  1. किसान को बाजार मे अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त हो
  2. उपभोक्ता को कृषि उत्पाद बाजार से कम कीमत पर उपलब्ध हो
  3. मध्यस्थों की भूमिका अत्यंत कम होनी चाहिए

 

कुशल कृषि विपणन की 5 प्रमुख विशेषताएँ :

  1. सस्ता और तीव्र परिवहन
  2. भंडारण अत्यंत कुशल और आधुनिक होना चाहिए
  3. मध्यस्थों की न्यून भूमिका
  4. किसानों मे धारण करने की क्षमता
  5. सूचना का प्रवाह तंत्र

 

भारतीय कृषि विपणन प्रणाली के दोषपूर्ण होने के निम्न कारण है :

  1. ग्रामीण क्षेत्रों मे परिवहन अत्यंत धीमा और खर्चीला है
  2. पर्याप्त भंडारण क्षमता का अभाव
  3. मध्यस्थों की अधिक भूमिका
  4. किसानों मे धारण क्षमता का अभाव
  5. सूचना का प्रवाह धीमा और अपारदर्शी
  6. मंडी मे बहु शुल्क प्रणाली
  7. मंडियों के बीच अत्यधिक दूरी

 

कृषि राज्य का विषय होता है अत: कृषि विपणन भी राज्य सूची के अंतर्गत आता है इस पर कानून बनाने का अधिकार भी राज्य को ही प्राप्त होता है। किसान कृषि विपणन का कार्य मंडी मे करता है। भारत मे मंडी 2 प्रकार की होती है –

  1. गैर-विनियमित मंडी – जिसका कोई नियामक संस्था नहीं होता है तथा जो निश्चित समय अंतराल मे गाँव के आस-पास आयोजित की जाती है इसलिए ऐसे मंडी को RPM-Rural Periodical Mandi कहा जाता है इन्हे ग्रामीण हाट कहा जाता है। भारत मे वर्तमान मे लगभग 22000 ग्रामीण हाट या मंडी है।
  2. विनियमित मंडी – वह मंडी जो राज्य के कानून द्वारा संचालित होती है उसे विनियमित मंडी कहा जाता है जैसे APMC- Agricultural Produce Market Committee(कृषि उत्पाद विपणन समिति) । APMC राज्य सरकार और राज्य की नियामक संस्थाओं द्वारा संचालित वह कृषि मंडी होती है जहां किसान अपने उत्पाद का पहला विक्रय करता है।
    1. लाइसेन्स प्रणाली जटिल और अपारदर्शी
    2. बहु लाइसेन्स प्रणाली
    3. मंडी मे बहु शुल्क प्रणाली
    4. APMC प्रत्यक्ष विपणन की अनुमति नहीं देता
    5. APMC संविदा कृषि की अनुमति नहीं देता
    6. राज्य सुधार के लिए उत्सुक नहीं रहते
    7. वर्ष 2003 मे केंद्र सरकार द्वारा मॉडल APMC act 2003 लाया गया इसका उद्देश्य –
      1. कृषि विपणन को कुशल बनाना
      2. APMC मे किसानों को उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त हो
      3. खाद्य प्रसंस्करण और कृषि निर्यात को बढ़ावा
      4. कृषि विपणन मे आवश्यक आधारभूत संरचना का विकास
      1. किसानों को प्रत्यक्ष विपणन की अनुमति
      2. कृषकों को अनुबंध कृषि की अनुमति
      3. APMC मे बहु शुल्क प्रणाली के स्थान पर एकल शुल्क प्रणाली को लागू करना
      4. APMC मे बहु लाइसेन्स प्रणाली को समाप्त कर पंजीकरण को शुरू करना जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़े
      5. विशिष्ट वस्तु (जल्दी खराब होने वाली वस्तु) के लिए विशिष्ट बाजार स्थापित हो।
      1. अनुबंध कृषि का शुल्क भी APMC मे चुकाना होगा
      2. कृषि विपणन को राज्य की नियामक संस्थाओं द्वारा विनियमित करना
      3. सभी राज्य कानून को लागू करने के लिए उत्सुक नहीं (केवल 22 राज्य ही लागू कर पाये)
      1. मॉडल APMC एक्ट 2003 को प्रभावी रूप से लागू करना
      2. कृषकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना
      3. APMC मे कृषि उत्पाद के साथ-साथ पशु उत्पाद के विपणन को भी बढ़ावा देना
      1. प्रत्यक्ष विपणन की अनुमति देना
      2. बहु शुल्क के स्थान पर एकल शुल्क प्रणाली को स्थापित करना
      3. अनुबंध कृषि को APMC के दायरे से बाहर करना
      4. कृषि उत्पाद के साथ-साथ पशु उत्पाद के विवरण को APMC मे बढ़ावा देना
      5. APMC के साथ-साथ गैर-विनियमित मंडी जैसे ग्रामीण हाट, RPM को विनियमित मंडी मे (APMC मे ) परिवर्तित करना। देश भर मे लगभग 22000 RPM है जो विभिन्न राज्यों मे अलग-अलग नाम से जाने जाते है जैसे पंजाब,राजस्थान मे “अपनी मंडी”, आन्ध्रप्रदेश,तेलंगाना मे “रायथू”, तमिलनाडू मे “उझावर” और महाराष्ट्र मे “हड़पसर” कहते है।
      6. देश के सभी APMC मंडी को ई-नाम से जोड़ने का प्रयास


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