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नियोजन [ Planning ] – Important For SSC, UPSC & State Exams

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प्रारूप—
  1. नियोजन क्या है ?
  1. आर्थिक नियोजन ?
  1. भारत मे नियोजन का इतिहास
  1. नियोजन की प्रक्रिया
  1. योजना आयोग
  1. NDC
  1. नीति आयोग
  1. भारत मे नियोजन की आवश्यकता
  1. वर्तमान मे नियोजन की प्रासंगिकता
  1. नियोजन का उद्देश्य
  1. नियोजन के प्रकार
  1. पंचवर्षीय योजना की समीक्षा
  1. मूल्यांकन
  1. योजना आयोग और नीति आयोग मे अंतर

आज़ादी के बाद देश मे प्राकृतिक संसाधन असीमित थे किन्तु भौतिक संसाधन सीमित थे।

सरकार द्वारा इसमे उपलब्ध सीमित संसाधन सीमित समय मे कुशलतम उपयोग करके अधिकाधिक उद्देश्य (आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, पर्यावरणीय) को प्राप्त कर संवृद्धि दर को बढ़ाने के लिए रणनीति अपनाई जाती है उसे नियोजन कहा जाता है।

आज़ादी के बाद सरकार द्वारा जो नियोजन अपनाया गया उसे आर्थिक नियोजन कहा जाता है जो पंचवर्षीय योजनाओं पर आधारित है। भारत मे आर्थिक नियोजन की अवधारणा को पूर्व सोवियत संघ से लिया गया है। भारत मे आर्थिक नियोजन समवर्ती सूची मे शामिल है।

भारत मे नियोजन का इतिहास :

  1. वर्ष 1934 मे m. विश्वेशरैया द्वारा पुस्तक प्रकाशित हुई जिसका नाम “planed economy for India”। इन्हे भारत मे नियोजन का जनक भी कहा जाता है
  2. वर्ष 1938 मे भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के हरिपुरा सम्मेलन मे राष्ट्रीय नियोजन समिति का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू थे।
  3. 1944 मे मुंबई के 8 उद्योगपतियों द्वारा बॉम्बे प्लान बनाया गया
  4. 1944 मे श्रीमन नारायण द्वारा गांधीवादी प्लान बनाया गया।
  5. 1945 मे m.n. रॉय द्वारा जन योजना बनाया गया।
  6. 1950 मे जय प्रकाश नारायण द्वारा सर्वोदय प्लान बनाया गया
  7. 1950 मे योजना आयोग का गठन किया गया। योजना आयोग के द्वारा भारत मे एक नियोजन के रूप मे पंचवर्षीय योजनाओं को शुरू किया गया (जो 5 वर्ष के लिए होती थी)। भारत मे पहली पंचवर्षीय योजना की शुरुवात अप्रैल 1951 से हुई तथा 31 मार्च 2017 तक 12 पंचवर्षीय योजनाएँ चलाई गई।
  8. 2015 मे योजना आएग को समाप्त कर नीति आयोग का गठन किया गया। नीति आयोग द्वारा पंचवर्षीय योजनाओं को समाप्त करके 15 वर्षीय विजन प्लान , 7 वर्षी रणनीतिक प्लान और 3 वर्षीय कार्य योजना को शुरू किया गया।


नियोजन की प्रक्रिया : पूर्व मे भारत मे पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण योजना आयोग द्वारा किया जाता था।

पूर्व मे भारत मे पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण योजना आयोग द्वारा किया जाता था योजना आयोग गैर – संवैधानिक निकाय था इसकी स्थापना मार्च 1950 मे संसद मे पारित विशेष प्रावधान के तहत किया गया था।

योजना आयोग मे अध्यक्ष स्वयं pm होते है। अध्यक्ष के अलावा सबसे महत्वपूर्ण पद उपाध्यक्ष का होता है । इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे। योजना आयोग मे राज्यों की कोई भूमिका नहीं होती है। योजना आयोग के पहले अपाध्यक्ष गुलजारी लाल नन्दा , पहले अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू और अंतिम उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आलुवालिया और अंतिम अध्यक्ष नरेंद्र मोदी। योजना आयोग द्वारा पंचवर्षीय योजना का निर्माण किया जाता था तथा उसकी स्वीकृति के लिए उसे NDC-राष्ट्रीय विकास परिषद (स्थापना-1952, अध्यक्ष-PM, सदस्य-केंद्र के अलावा राज्यों के CM और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल) के पास भेजा जाता था। NDC योजना आयोग की तुलना मे उच्चतर संस्था है (गैर-संवैधानिक) । NDC पंचवर्षीय योजना मे संशोधन के लिए पुन: योजना आयोग के पास भेज सकता था।

NDC द्वारा स्वीकृति के पश्चात पंचवर्षीय योजना को संसद मे साधारण बहुमत द्वारा पारित करवाया जाता था। तथा इसके पश्चात देश मे पंचवर्षीय योजना को लागू किया जाता था।

वर्ष 2015 मे योजना आयोग को समाप्त करके नीति आयोग का गठन किया गया। नीति आयोग गैर संवैधानिक निकाय है।

नीति(NITI – National Institute for Transforming India) आयोग की संरचना : नीति आयोग थिंक टैंक के रूप मे काम करता है।

  1. पूर्णकालिक सदस्य – अध्यक्ष(PM), उपाध्यक्ष और CEO
  2. अर्द्ध कालिक सदस्य – 2 सदस्य तथा 4 विशेष आमंत्रित सदस्य (विश्व विद्यालय तथा शोध संस्थाओं से)
  3. परिषद – 2 मुख्य परिषद –
    1. संचालन परिषद – जिसमे राज्यों के CM और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते है
    2. क्षेत्रीय परिषद – जिसमे प्राकृतिक आपदा तथा महामारी से प्रभावित राज्य शामिल होते है।
  4. शाखाएँ –
    1. टीम India Wing
    2. रिसर्च wing

 

योजना आयोग और नीति आयोग मे अंतर –

Q. भारत मे नीति आयोग द्वारा अनुसरण किए जा रहे सिद्धांत इसके पूर्व के योजना आयोग द्वारा अनुसारित सिद्धांत से किस प्रकार भिन्न है।

योजना आयोगनीति आयोग
योजना आयोग की स्थापना मार्च 1950 मे संसद मे पारित विशेष संकल्प के द्वारा किया गया।नीति आयोग की स्थापना वर्ष 2015 मे संसद मे पारित विशेष संकल्प द्वारा किया गया।
योजना आयोग केंद्रीकृत संस्था है जिसमे राज्यों की कोई भागीदारी नहीं होतीनीति आयोग विकेंद्रीकृत संस्था है जो केंद्र और राज्य के सहयोगात्मक संघवाद पर आधारित है। इसमे केंद्र के साथ – साथ राज्यों को भी शामिल किया जाता है।
योजना आयोग पंचवर्षीय योजना का निर्माण करता है तथा उसे राज्यों द्वारा लागू किया जाता हैनीति आयोग राज्यों के साथ मिलकर नियोजन का निर्माण करता है और राज्यों द्वारा लागू करने मे उन्हे सहयोग भी देता है
योजना आयोग पंचवर्षीय योजना का निर्माण और उसे लागू करता हैनीति आयोग द्वारा 15 वर्षीय विजन प्लान, 7 वर्षीय रणनीतिक प्लान और 3 वर्षीय कार्य योजना को लागू किया जाता है।
योजना आयोग के पास पंचवर्षीय योजना मे राज्यों को वित्त आवंटन करने का भी अधिकार थावित्त आवंटन का अधिकार नीति आयोग को नहीं दिया गया है
योजना आयोग हमेशा केंद्र सरकार के प्रति उत्तर दायी होता है तथा उसमे राज्यों का प्रतिनिधित्व नहीं होता हैनीति आयोग की कार्य प्रणाली सहयोगात्मक संघवाद पर आधारित होती है यह सरकार के लिए थिंक टैंक का भी कार्य करता है जो योजना आयोग द्वारा नहीं किया जाता।

नियोजन का उद्देश्य : GEMS –

  1. G – Growth (समृद्धि) – दूसरी पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य
  2. E – Equity (समता) – चौथी पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य
  3. M – Modernization (आधुनिकीकरण) – छठी और सातवीं पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य
  4. S – Self reliance (आत्मनिर्भरता) – तीसरी पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य

 

भारत मे नियोजन की आवश्यकता –

  1. भारत को निम्न संतुलन आय जाल से बाहर निकालना
  2. देश मे उपलब्ध सीमित संसाधनों के कुशलतम उपयोग के लिए नियोजन की आवश्यकता पड़ी।
  3. देश मे रोजगार और सामाजिक न्याय को बढ़ाने के उद्देश्य से नियोजन की आवश्यकता पड़ी।
  4. केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघ वाद को बढ़ाने के लिए नियोजन की आवश्यकता पड़ी।
  5. वैश्वीकरण के दौर मे राष्ट्र हित का संरक्षण करने हेतु नियोजन की आवश्यकता पड़ी तथा अपने शैशव उद्योगों को संरक्षण देने के लिए शैशव उद्योग संरक्षण नीति सरकार द्वारा लागू की गई

 

नियोजन के लिए सरकार द्वारा जुटाये गए संसाधन के स्त्रोत –

  1. कर राजस्व
  2. गैर-कर राजस्व
  3. सरकार की लघु बचत योजनाएँ
  4. बाजार उधारी (आंतरिक और बाह्य स्त्रोतों से)
  5. विनिवेश से प्राप्ति
  6. विदेशी निवेश की प्राप्ति
  7. मौद्रीकृत घाटा

 

नियोजन के प्रकार

  1. केंद्रीकृत नियोजन
  2. विकेंद्रीकृत नियोजन
  3. आदेशात्मक नियोजन
  4. निदेशात्मक नियोजन
  5. पंचवर्षीय योजना
  6. अवकाश योजना
  7. अनवरत योजना
  8. दीर्घकालिक योजना

 

पंचवर्षीय योजना – जहां नियोजन का निर्माण और संचालन पाँच वर्ष के लिए किया जाता है। पाँच वर्ष पश्चात ही उसकी समीक्षा और मूल्यांकन किया जाता है भारत मे 1951 से 2017 तक 12 पंचवर्षीय योजना का संचालन किया गया।

दीर्घ कालिक नियोजन – जहां नियोजन का निर्माण दीर्घ काल के लिए होता है (15 से 20 वर्ष) जैसे नीति आयोग का 15 वर्षीय विजन प्लान और वर्ष 2022 से 47 तक अमृत काल 25 वर्ष के लिए।

 

भारत मे नियोजन :

प्रथम चरण : 1951 से 1966 तक (1 से 3 पंचवर्षीय योजना)

द्वितीय चरण : 1969 से 1990 तक (4 से 7 पंचवर्षीय योजना)

तृतीय चरण : 1992 से 2017 तक (8 से 12 पंचवर्षीय योजना)

चौथा चरण : नीति आयोग

पाँचवाँ चरण : अमृतकाल

 

  1. प्रथम चरण :
    • 1951 से 1966
    • यहाँ तीन पंचवर्षीय योजना चली
    • पहली पंचवर्षीय योजना – 1951-56
    • द्वितीय पंचवर्षीय योजना – 1956-61
    • तृतीय पंचवर्षीय योजना – 1961-66
    • विशेषता :
      • केंद्रीकृत नियोजन
      • सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका
      • कृषि और औद्योगीकरण के विकास पर बल दिया गया
      • इस दौरान आयात निर्भरता अत्यधिक थी।
      • उद्योगों मे लाइसेन्स राज और परमिट राज की शुरुआत हुई
    • मॉडल आधारित :
      • पहली – हेराड डोमर मॉडल
      • दूसरी – महालनोबिस मॉडल
      • तीसरी – सुखमय चक्रवर्ती मॉडल
    • पहली पंचवर्षीय योजना :
      • कृषि पर ज़ोर
      • महत्वपूर्ण घटनाक्रम :
        • 1952 मे सामुदायिक विकास कार्यक्रम की शुरुआत हुई
        • बड़े बाँधों का निर्माण
    • दूसरी पंचवर्षीय योजना :
      • औद्योगीकरण पर बल दिया गया
      • महत्वपूर्ण घटना :
        • दूसरी औद्योगिक नीति लाई गई
        • उद्योगों मे लाइसेन्स राज की शुरुआत हुई
        • भारत मे ट्रिकल डाउन सिद्धांत की शुरुआत हुई जिसका उद्देश्य समृद्धि दर को बढ़ाकर गरीबी कम करना
        • इस योजना का उद्देश्य औद्योगीकरण को बढ़ावा देकर समृद्धि दर को बढ़ाना था इसी दौरान दुर्गापुर , भिलाई , बोकारो और राऊरकेला मे स्टील प्लांट की शुरुआत की गई
        • चितरंजन कोच factory और इंटीग्रल कोच factory की स्थापना
    • तीसरी पंचवर्षीय योजना :
      • 1961-66
      • आत्मनिर्भरता
      • इसी दौरान सरकार द्वारा आयात प्रतिस्थापन की नीति को अपनाया गया इसका अर्थ है अधिकांश वस्तुओं का निर्माण देश मे ही हो तथा केवल उनही वस्तुओं का आयात किया जाए जिनका निर्माण देश मे संभव ना हो।
      • इसी दौरान 1962 मे भारत चीन युद्ध , 1965 मे भारत – पाक युद्ध , 1966 मे उड़ीसा बंगाल मे भयंकर अकाल
      • ITBI की स्थापना
    • अवकाश योजना : 1966-69
      • उपलब्धि :
        • हरित क्रांति
  2. द्वितीय चरण : 1969 -1990
    1. चौथी पंचवर्षीय योजना – 1969-74
    2. पाँचवीं पंचवर्षीय योजना – 1974-79 (1979-80 – अनवरत योजना)
    3. छठी पंचवर्षीय योजना – 1980-85
    4. सातवीं पंचवर्षीय योजना – 1985-90
    5. विशेषता :
      1. केंद्रीकृत नियोजन
      2. सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका
      3. 1973 मे FERA कानून और 1969 मे MRTP कानून तथा 1969 मे ही 14 बेंकों का राष्ट्रीयकरण द्वारा सरकार का उद्योगों पर नियंत्रण और अधिक मजबूत हुआ
      4. 1980 मे निर्यात आधारित नीति को शुरू किया गया
    6. उद्देश्य :
      1. चौथी पंचवर्षीय योजना – स्थिरता के साथ आर्थिक समृद्धि दर को बढ़ाना और समता पर बल दिया
      2. पाँचवीं पंचवर्षीय योजना – गरीबी उन्मूलन पर ज़ोर (गरीबी हटाओ नारा)
      3. छठी पंचवर्षीय योजना – निर्धनता उन्मूलन और देश मे आधारभूत संरचना का निर्माण
      4. सातवीं पंचवर्षीय योजना – आधुनिकीकरण (सूचना की क्रांति – सेम पित्रोदा द्वारा)
    7. महत्वपूर्ण घटनाक्रम –
      1. 14 बेंकों का राष्ट्रीयकरण
      2. MRTP कानून
      3. FERA कानून
      4. परिवार नियोजन
      5. पहला परमाणु परीक्षण
      6. RRB की स्थापना
      7. IRDP-समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम की शुरुआत
      8. काम के बदले अनाज कार्यक्रम की शुरुआत
      9. नेहरू योजना , इत्यादि गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम को शुरू किया गया
      10. जनता सरकार द्वारा अनवरत योजना शुरू
      11. नाबार्ड की स्थापना
      12. 6 अन्य बेंकों का राष्ट्रीयकरण
      13. EXIM बैंक की स्थापना
      14. निर्यात आधारित नीति की शुरुआत
      15. राष्ट्रीय आवास बैंक
  3. अवकाश योजना – 1990-92 :
    1. महत्वपूर्ण घटनाक्रम :
      1. LPG सुधार लागू
      2. सिडबी की स्थापना
      3. रुपए का तीसरी बार अवमूल्यन हुआ
  4. तीसरा चरण : 1992-2017 :
    1. आठवीं पंचवर्षीय योजना – 1992-97
    2. नौवीं पंचवर्षीय योजना – 1997-2002
    3. दसवीं पंचवर्षीय योजना – 2002-2007
    4. 11 वीं पंचवर्षीय योजना – 2007-2012
    5. 12 वीं पंचवर्षीय योजना – 2012-2017
    6. विशेषता :
      1. नियोजन की प्रक्रिया मे बदलाव , इसे केंद्रीकृत के स्थान पर विकेंद्रीकृत और निदेशात्मक को अपनाया गया ।
      2. नियोजन के निर्माण मे राज्यों औए पंचायती राज संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका
      3. सरकार की भूमि केवल नियोजन के निर्माण मे जबकि उसे लागू करने का कार्य निजी क्षेत्रों को सौंपा गया।
      4. लाइसेन्स राज और परमिट राज को समाप्त किया गया
      5. वर्ष 1999 मे FERA कानून को समाप्त कर FEMA को लागू किया गया
      6. 1998 मे MRTP कानून को समाप्त कर दिया गया तथा वर्ष 2002 मे भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का गठन किया गया
    7. उद्देश्य :
      1. आठवीं पंचवर्षीय योजना :
        1. रोजगार वृद्धि , गरीबी मे कमी के साथ मानव संसाधन के विकास पर बल
      2. नौवीं और दसवीं पंचवर्षीय योजना :
        1. आर्थिक समता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना
      3. 11 वीं पंचवर्षीय योजना :
        1. समवेशी विकास पर बल
      4. 12 वीं पंचवर्षीय योजना:
        1. अत्यधिक तीव्र समवेशी विकास और संपोषणीय विकास
    8. महत्वपूर्ण घटना :
      1. 1992 मे SEBI को विनियामक संस्था बनाया गया
      2. वित्तीय क्षेत्र की शुरुआत
      3. IRDA-भारतीय बीमा नियामक विकास प्राधिकरण की स्थापना
      4. FRBM कानून 2003
      5. अमेरिका मे मंदी
      6. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA कार्यक्रम)
      7. नरेगा की शुरुआत
      8. मनरेगा – 2009
  5. चौथा चरण :
    1. नीति आयोग द्वारा 15 वर्ष विजन प्लान , 7 वर्षीय रणनीतिक प्लान और 3 वर्षीय कार्य योजना को शुरू किया गया। डायग्राम
  6. पाँचवाँ चरण : वर्ष 2022 से लेकर 2047 तक, जिसे सरकार द्वारा अमृतकाल की संज्ञा दी गई इस दौरान सरकार भारत को विकसित राष्ट्र के रूप मे स्थापित करना चाहती है तथा वृद्धि दर को बढ़ाकर समावेशी विकास के द्वारा हर व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचाना चाहती है। यह विकास पर्यावरणीय अनुकूल विकास होगा। इसके लिए सरकार सरकार द्वारा सप्त ऋषि को चिन्हित किया गया –
    1. समावेशी विकास
    2. क्षमता विकास
    3. अंतिम व्यक्ति तक पहुँच
    4. अवसंरचना और निवेश
    5. हरित विकास
    6. वित्तीय क्षेत्र
    7. युवा शक्ति
    • महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण
    • विश्वकर्मा कौशल विकास
    • युवा शक्ति को रोजगार

नियोजन का मूल्यांकन :

  1. मृद्धि –
    1. सकारात्मक –
      1. समृद्धि दर जो लगभग 2-3% था वह औसतन 5-6% हो गया।
      2. औद्योगिक समृद्धि दर मे औसतन 5-6% की वृद्धि हुई
      3. भारत निम्न आय संतुलन जाल से बाहर निकाल सका
    2. नकारात्मक –
      1. समृद्धि दर मे वृद्धि समावेशी ना होकर अपवर्जित रहा

 

  1. समता –
    1. सकारात्मक –
      1. भारत मे औसत प्रति व्यक्ति आय मे वृद्धि हुई है जो वर्तमान मे लगभग 1 लाख 72 हजार रुपया सालाना है। इस प्रकार आय मे वृद्धि ने लोगो की क्रय शक्ति क्षमता को बढ़ावा दिया है।
      2. महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण मे वृद्धि हुई है
      3. ग्रामीण क्षेत्रों मे आय मे वृद्धि शहरी और ग्रामीण के बीच की असमानता को कम किया
    2. नकारात्मक –
      1. प्रति व्यक्ति आय मे यह वृद्धि समावेशी ना होकर अपवर्जित ही रहा है इस कारण सापेक्ष गरीबी मे वृद्धि हुई है तथा भारत का गिनी गुणांक भी भी बढ़ा है

 

  1. आधुनिकीकरण –
    1. सकारात्मक –
      1. आज़ादी के बाद देश मे निरंतर नवीन और अत्याधुनिक आधारभूत संरचना का विकास हुआ है जैसे बन्दरगाह मेट्रो, वंदे भारत, TFC इत्यादि। आधारभूत संरचना का निर्माण अर्थव्यवस्था मे गुणक प्रभाव डालता है साथ ही वर्तमान मे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डाटा माइनिंग, IOT इत्यादि ने ना केवल आधुनिकता को बढ़ावा दिया है बल्कि इनके द्वारा कृषि उद्योग और सेवा के विकास को भी बल मिला है
    2. नकारात्मक –
      1. भारत मे अन्य विकसित देशों की अपेक्षा logistic लागत अधिक है इसका मुख्य कारण पर्याप्त आधारभूत संरचना का अभाव
      2. भारत मे ICOR अधिक है
      3. भारत मे मांग आधारित कौशल युक्त श्रमिकों की भरी कमी है

 

  1. आत्मनिर्भरता –
    1. सकारात्मक –
      1. भारत के निर्यात मे लगातार वृद्धि यह प्रदर्शित करता है कि भारत मे निर्मित वस्तुओं की विश्व मे अत्यधिक मांग है
      2. सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता के लिए किए गए प्रयास के अत्यंत लाभदायक परिणाम प्राप्त हुये है जैसे ODOP, unity mall कि अवधारणा , वोकल फॉर लोकल आदि
      3. भारत मे PLI और मेक इन इंडिया कार्यक्रम द्वारा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिला है
      4. पेट्रोल और डीजल मे ईथनोल का मिश्रण सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना, देश मे उपलब्ध लिथियम के भंडार का प्रयोग इत्यादि विदेशों पर कम निर्भरता आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया गया कदम है
    2. नकारात्मक –
      1. अभी भी आयात पर निर्भरता अधिक होने से भारत के चालू खाते घाटे मे लगातार वृद्धि
      2. आयात अधिक होने से डॉलर के मुक़ाबले रुपये के मूल्यह्रास मे वृद्धि से देश मे मुद्रास्फीति की दर मे भी बढ़ोतरी हुई है
      3. विदेशी कंपनियों द्वारा अत्यधिक निवेश सरकार के निर्णय लेने कि क्षमता को सीमित किया है।

 

नियोजन की प्रासंगिकता :

अर्थशास्त्रियों के एक गुट का मानना है कि विश्व के अधिकांश देशों की तरह भारतीय अर्थव्यवस्था को भी बाजार आधारित बनाया जाए जो पूर्ण रूप से मांग और आपूर्ति पर निर्भर हो किन्तु बाजार अर्थव्यवस्था केवल मांग और आपूर्ति के संबंध को बताता है ना कि मांग और आवश्यकता के बीच के संबंध को। अत: निम्न से यह स्पष्ट होता है कि देश के आर्थिक विकास मे सरकार के हस्तक्षेप की महत्वपूर्ण भूमिका है जो नियोजन की आवश्यकता को दर्शाता है ।

  • भारत मे लगभग 1/4 जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती है।
  • मानव विकास सूचकांक मे भारत की स्थिति मे लगातार गिरावट
  • वैश्विक भुखमरी सूचकांक मे BRICS देशों मे भारत की स्थिति अत्यंत कमजोर

 


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